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अंजुमन बाग व बहार, बरहपुरा में डा० मो० परवेज के नाम पचास खतूत पुस्तक का लोकार्पण

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अंजुमन बाग व बहार, बरहपुरा में डा० मो० परवेज के नाम पचास खतूत पुस्तक का लोकार्पण 17 अगस्त 2025 अंजुमन बाग व बहार बरहपूरा भागलपुर के बैनर तले मो० शादाब आलम के आवास पर शायर जौसर अयाग की अध्यक्षता में डा० मो० परवेज के नाम पचास खतूत का लोकार्पण अंजुमन के महासचिव डा० मो० परवेज, मो० शादाब आलम, जौसर अयाग, डा० नैयर हसन, डा० हबीब मुर्शीद खॉ मुगेर विश्वविद्यालय के उर्दू विभाग के विभाध्यक्ष प्रो० शाहीद जमाल रजमी, डा० अरशद रजा, फेज रहमान, मो० ताजउददीन, सैयद शब्बीर अहमद जाफरी मजहर मोजाहिदी अनीस नजमी कमर तावों, मो० सहीम उददीन के हाथों हुआ। इस मौके पर मो० शादाब आलम ने कहा कि डा० मो० परवेज अंजुमन बाग व बहार के महासचिव और बरहपुरा भागलपुर के निवासी हैं। इनकी कई पुस्तकें मंजर ए आम पर आकर अदबी दुनिया में मशहूर हो चुकी है। नजीर फतेहपुरी ने डा० मो० परवेज के नाम पचास खतूत लिखा था जो आज किताबी शक्ल में आज मंजर ए आम पर आयी है जो हम लोगों के लिए बड़ी बात है। इस मुख्य अतिथि प्रो० शाहीद जमाल रजमी ने डा० मो० परवेज को मुबारकबाद पेश की और उर्दू खतूत के हवाले से मिर्जा गालीब, मौलाना अबुल कलाम आजाद अल्लामा...

भागलपुर के उर्दू साहित्य प्रेमियों को बहुत याद आएंगे शादाब रज़ी

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शादाब रज़ी ( मोहम्मद रज़ी अहमद) एक प्रतिष्ठित उर्दू कवि, आलोचक और शोधकर्ता थे, जो शास्त्रीय और आधुनिक साहित्यिक परंपराओं के साथ गहरे जुड़ाव के लिए जाने जाते थे।  12 जनवरी, 1955 को शेखपुरा, बिहार में जन्मे, उन्होंने उर्दू कविता और साहित्यिक आलोचना में महत्वपूर्ण योगदान दिया। पटना विश्वविद्यालय से एम.ए. उर्दू में स्वर्ण पदक विजेता और तिलकमांझी भागलपुर विश्वविद्यालय से डी.लिट., शादाब रज़ी ने टी.एम. भागलपुर विश्वविद्यालय में उर्दू विभाग के विभागाध्यक्ष के रूप में कार्य किया।  उनके काव्य संग्रह में ग़ज़ल, नज़्म, माहिया, दोहा और रुबाइयात शामिल थे, जो उनकी बहुमुखी प्रतिभा और विविध काव्य रूपों पर उनकी पकड़ को दर्शाता है। एक आलोचक और शोधकर्ता के रूप में, उन्होंने " उर्दू तनकीद में नई रुज़ानात: बिहार के हवाले से" नामक साहित्यिक आलोचना में एक महत्वपूर्ण कृति लिखी।   उनके विद्वतापूर्ण लेख प्रमुख उर्दू पत्रिकाओं में प्रकाशित हुए थे, जिनमें शे र ओ हिकमत, फ़िक्र ओ तहक़ीक़, सबरस, आजकल, नया दौर, ऐवान-ए-उर्दू, शायर और अलीगढ़ मैगज़ीन शामिल हैं।  शादाब रज़ी का 13 सितंबर...

कैसे बने इज़हार अली से एस कुमार

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भागलपुर जिले में कई कलाकार हैं लेकिन उनमें अगर किसी ने अपने नाम को ब्रांड बनाया है तो वो एस कुमार है। एस कुमार का जन्म भागलपुर जिले के जब्बारचक मोहल्ले में एक मध्यम वर्गीय परिवार में हुआ। एस कुमार की माता एक निजी अस्पताल में नर्स का कार्य करती थी। बचपन से ही गाने के शौकीन एस कुमार जब बड़े हुए तो उन्हे  कई लोगों ने मंच दिया। आरंभिक मंचों पर एस कुमार ने शब्बीर कुमार,मोहम्मद अज़ीज़ इत्यादि के गीतों को गाकर अपनी पहचान बनाई। फिर कुछ दिनों तक उन्हें गोपालगंज में  रहना पड़ा। बचपन में लोग उन्हे सच्चू नाम से जानते थे।  यहां से शुरू होता है एक  ब्रांड एस कुमार का कैरियर आरंभ। गोपलगंज, जिसे कलाकारों के लिए बिहार में मिनी दुबई के नाम से भी जाना जाता है, यहां रहते हुए एस कुमार ने काफ़ी कुछ सीखा।    गोपालगंज ने भागलपुर शहर के कई और कलाकार भी थे लेकिन उनमें ख्याति एस कुमार ने हासिल किया। फिर एस कुमार वापस लौट आए अपने शहर और भागलपुर में फिर से स्ट्रगल करने लगे। विश्वस्त सूत्रों ने बताया है कि एक बार भागलपुर में संगीतकार रविंद्र जैन आए थे...

वसीम सिद्दीकी ने विदेशों में बिहार कृषि विश्विद्यालय का नाम रौशन किया

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कल का भागलपुर: सबौर: बिहार कृषि विश्वविद्यालय, सबौर के कृषि वैज्ञानिक डॉ. मोहम्मद वसीम सिद्दीकी ने स्टैनफोर्ड विश्वविद्यालय की प्रतिष्ठित "विश्व के शीर्ष 2% वैज्ञानिकों" की सूची में लगातार चार वर्षों तक शामिल होकर एक उल्लेखनीय उपलब्धि हासिल की है। एल्सेवियर द्वारा प्रकाशित यह सम्मान, उनके शोध आउटपुट और प्रभाव के आधार पर विश्व स्तर पर अग्रणी शोधकर्ताओं को उजागर करता है। इस प्रतिष्ठित सूची में डॉ. सिद्दीकी का शामिल होना कृषि विज्ञान में उनके महत्वपूर्ण योगदान को दर्शाता है, विशेष रूप से फलों और सब्जियों में कटाई के बाद होने वाले नुकसान को कम करने में। बिहार में ताड़ आधारित उद्योगों पर उनके अभिनव कार्य ने राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय पेटेंट भी अर्जित किए हैं। 90 से अधिक उच्च-गुणवत्ता वाले शोध लेखों और 25 पुस्तकों के प्रकाशन के साथ, डॉ. सिद्दीकी का शोध प्रभाव उनके उल्लेखनीय एच-इंडेक्स और आई10 इंडेक्स स्कोर के माध्यम से स्पष्ट है। बिहार कृषि विश्वविद्यालय में अपनी भूमिका के अलावा, डॉ. सिद्दीकी यूएसए में विश्व खाद्य संरक्षण केंद्र के कार्यकारी निदेशक और बांग्लादेश स्टेट ...

द केयर ऑफ ह्यूमैनिटी की ओर से गरीबों को कंबल वितरित किया गया

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आज होली कॉन्वेंट स्कूल के प्रांगण में दा केयर ऑफ ह्यूमैनिटी द्वारा कंबल वितरित किया गया। जिसमें शहर के गणमान्य व्यक्तियों ने अपनी उपस्थिति दर्ज कराई। संस्था के संयोजक शाहिद हुसैन ने शहर के उप मेयर सलाउद्दीन अहसन, शिक्षाविद राजीव कांत मिश्रा , हबीबपुर थाना प्रभारी श्वेता सिन्हा, जिला एथलीट एसोसियेशन के उपाध्यक्ष नसर आलम को इस कंबल वितरित समारोह में आमंत्रित किया। इन्होंने अपने वक्तव्य से समाज को सम्बोधित किया। संस्था के सदस्यों ने इस कार्यक्रम को बहुत सुचारू रुप से संचालित किया और कार्यक्रम सफल बनाया उसमें अफज़ल ,अरसलान, सद्दाम,एख़लाक,،साजिद,काज़िम क़ासमी, गुड्डू और संस्था के वरिष्ठ सदस्य महमूद शाज , शहबाज़ ख़ान इत्यादि की उपस्थिति दर्ज रही।

भागलपुर में दिखाई दिए पूर्व सांसद

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पूर्व केंद्रीय मंतरी सैयद शाहनवाज़ हुसैन, महापौर नगर निगम भागलपुर डॉक्टर बसुंधरा लाल,उप महापौर नगर निगम भागलपुर डॉक्टर मोo सलाहउद्दीन अहसन, संतोष साह अध्य्क्ष बीजीपी भागलपुर,प्रोफेसर एज़ाज़ अली रोज श्री रमन करण जी के साथ रिज़वान खान ने भागलपुर शहर के दक्षिणी क्षेत्र में खुले रेलवे टिकट काउंटर और रास्ते के विकास सुविधा बढ़ाने पर मालदा डिवीज़न के अधिकारीयों के साथ पर चर्चा किया

दिलकश ने किया कमाल समाज के उत्थान की दिशा में उठाया कदम

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नसीमा दिलकश, पिता - मों. गुलाम मुस्तफा, माता - स्व. कैसर जहाँ, पति-  एम. एम. सुल्तान, पता- मायागंज, थाना - बरारी, जिला - भागलपुर की निवासी हैं, सामाजिक कार्यकर्ता नसीमा दिलकश को  ति. माँ.भा. वि. वि. के सामाजिक विज्ञान संकाय के विषय राजनीति विज्ञान विभाग में  पी.एच.डी. की उपाधि प्राप्त हुई है ।इनके शोध का विषय " जनजातीय महिलाओं का आत्मविकास और सशक्तिकरण (गुमला जिले की पंचायत राज संस्थाओ के संदर्भ में एक अध्ययन )" है । डॉ. नसीमा दिलकश के शोध निदेशक  डॉ. चन्द्ररेश्वर प्रसाद सिंह, पूर्व विभागाध्यक्ष एवम पूर्व प्रतिकुलपति, कामेश्वर सिंह संस्कृत वि. वि. दरभंगा हैं । इनके शोध कार्य से राज्य और राष्ट्र को आदिवासी महिलाओं के लिए नीति निर्माण में सहायक सिद्ध होगा ।